Kumaoni Raita : उत्तराखंड की रसोई में स्वाद और सेहत का अनोखा मेल देखने को मिलता है. यहां की एक खास रेसिपी है – कुमाउनी खीरे का रायता. यह कोई साधारण रायता नहीं, बल्कि पहाड़ों की खुशबू, मौसम की ताजगी और परंपरा का हिस्सा है. इस रायते में जो खीरा इस्तेमाल होता है, वह साइज में थोड़ा बड़ा होता है और रंग में हल्का पीला दिखता है. स्थानीय लोग इसे ‘कड़ी’ कहते हैं. अगर आपके पास यह न भी हो, तो आप साधारण खीरे से भी यह रायता बना सकते हैं.
कैसे बनता है कुमाउनी खीरे का रायता?
इस रायते को बनाने के लिए सबसे पहले खीरे को छीलकर कद्दूकस कर लेना होता है. पहाड़ी खीरे के बीज आमतौर पर सॉफ्ट होते हैं, इसलिए उन्हें अलग करने की ज़रूरत नहीं होती. अगर बीज सख्त हों तो उन्हें निकाल देना बेहतर रहेगा.
इसके बाद तैयार होता है मसाला. इसमें डाली जाती है थोड़ी सी राई, हरी मिर्च और ताजे धनिए की पत्तियां. इन सबको पीसकर एक अच्छा सा पेस्ट बना लिया जाता है. इस मसाले को खीरे में मिलाया जाता है. मसाले की मात्रा स्वाद के अनुसार बढ़ाई या घटाई जा सकती है.
अब आता है दही डालने का समय. आप घर का दही लें या पैकेट वाला दोनों से यह रायता टेस्टी बनता है. अगर दही पतला है तो खीरे का पानी निचोड़ लें. नहीं तो आप दोनों को ऐसे ही मिलाकर भी बना सकते हैं. दही को अच्छे से मिलाने के बाद उसमें डाली जाती है सिर्फ हल्दी और नमक. यही इसकी खास बात है कम मसाले, ज्यादा स्वाद.
खाने में कैसे परोसें?
यह रायता हर मौसम में खाया जा सकता है. गर्मियों में यह शरीर को ठंडक देता है और पाचन भी ठीक रखता है. आप इसे दाल-चावल, रोटी-सब्ज़ी या पराठे के साथ परोस सकते हैं. उत्तराखंड में इसे खासतौर पर आलू के गुटके के साथ खाया जाता है. ठंडा-ठंडा रायता खाने का मजा दोगुना कर देता है.