पूरे साल बाजार से नहीं खरीदते एक नींबू, ये गृहणी घर पर ही करती है बंपर पैदावार

पश्चिम चम्पारण. जिले की महिलाएं इन दिनों अपने घरों में ही छत पर रखे गमलों में सब्जियों और फलों की सफल बागवानी कर रही हैं. परवल, टमाटर और बैंगन को कौन पूछे, महिलाएं अब गमले में ही सेब और खास किस्म के नींबू भी उगाने लगी हैं. कुछ ऐसा ही किया है जिला मुख्यालय बेतिया के सुभाष नगर की रहने वाली रानी पांडे ने.

रानी ने करीब 2 साल पहले गमले में ही नींबू की रसराज किस्म का पौधा लगाया. पौधा लगाने के अगले साल ही उसमें नींबू आने लगे. लेकिन पौधों की अच्छी सेहत के लिए रानी ने उन्हें बड़ा होने से पहले ही तोड़ दिया.

थर्मोकोल के गमले में नींबू की खेती

चार महीने बाद जब पौधा पूरी तरह से बढ़ गया, रानी ने उसमें नींबू आने दिए और पूरी तरह से पक जाने के बाद उन्हें तोड़कर इस्तेमाल शुरू किया. अब पौधा लगाने का दूसरा साल चल रहा है और नींबू का फल आना अपने चरम पर है. रानी के अनुसार, उन्होंने गमले में नींबू की खेती के लिए न तो ज्यादा खर्च किया है और न ही किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल किया है.

करीब 30 किलो मिट्टी की क्षमता वाले थर्मोकोल से बने मछली के कैरेट में उन्होंने पौधा लगाया और उसमें गोबर की खाद मिला दी. हर दिन सुबह–सुबह तय मात्रा में पानी देकर उन्होंने पौधे का खास ध्यान रखा. इसका नतीजा यह हुआ कि सिर्फ एक साल में ही पौधे से नींबू आना शुरू हो गए.

बिना बीज वाला, एंटी कैंसर गुण से भरा

रानी के पति और औषधीय पौधों की जानकारी रखने वाले रविकांत पांडेय बताते हैं कि ‘रसराज’ नींबू की एक खास किस्म है. इसके एक पौधे की कीमत 100 रुपए होती है. पौधे में पहले ही साल से फल आने लगते हैं, लेकिन पौधे की अच्छी बढ़त के लिए फल को पकने से पहले ही तोड़ दिया जाता है. लगभग दो साल में पौधा पूरी तरह से तैयार हो जाता है, जिसके बाद हर साल आप कम से कम 2000 नींबू आराम से ले सकते हैं.

बाजार से नहीं लाना पड़ेगा नींबू

मजे की बात यह है कि इस पौधे में साल भर नींबू लगे रहते हैं. बिना बीज वाला यह नींबू एंटी कैंसर गुणों से भरपूर होता है. बाजार में इसकी कीमत 5 रुपए प्रति नींबू तक होती है. कोई भी इस तरह से अपने घर पर नींबू का पौधा लगाकर फल पा सकते हैं. गर्मियों में नींबू की डिमांड बहुत बढ़ जाती है और कीमत भी आसमान छूती है. ऐसे में घर पर ही नींबू उगाना एक अच्छा आइडिया हो सकता है

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